Vande Mataram Debate: Sansad Mein Shabd, Zameen Par Kaam Gayab
हाल ही में संसद के भीतर वंदे मातरम् को लेकर लंबी राजनीतिक बहस की गई। घंटों तक भाषण दिए गए, भावनाएं दिखाई गईं और देशभक्ति की बातें दोहराई गईं। यह मुद्दा टीवी चैनलों पर छाया रहा और इसे बड़ी खबर के रूप में पेश किया गया। लेकिन इसी दौरान यह सवाल भी उठाया गया कि क्या इतनी लंबी चर्चा के बीच जनता से जुड़े असली मुद्दों पर कोई ठोस काम किया गया। Sansad Mein Behas, Ground Par Sannata संसद में वंदे मातरम् पर बहस को बेहद जरूरी बताया गया। यह कहा गया कि इससे राष्ट्रीय भावना मजबूत की जाती है। लेकिन उसी समय बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को नजरअंदाज किया गया। यह साफ दिखाई दिया कि बहस खत्म होने के बाद भी आम लोगों की जिंदगी में कोई तुरंत बदलाव नहीं आया। इसी वजह से यह चर्चा एक समाधान की बजाय राजनीतिक प्रदर्शन जैसी महसूस की गई। Dilli Ki Hawa Aur Logon Ki Saans राजधानी दिल्ली में हालात ऐसे हैं कि लोग बिना सिगरेट पीए ही सांस की गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। प्रदूषण के कारण फेफड़ों को नुकसान पहुंच रहा है और मास्क रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। इसके बावजूद संसद में प्रदूष...